कइसे करजा उतारब तोहार गोरिया॥
रहनीं गाँवे क बिगड़ल लखेरा गोरी
झूठ बोली लबरई करीं हम चोरी
प्यार मंगनी न सुनलू गोहार गोरिया ।
कइसे करजा उतारब तोहार गोरिया॥
कहलू अपने के जाके सुधार तनी
रूप नाहीं सहूरे क होख धनी
नाहीं सपना में पाइब विसार गोरिया ।
कइसे करजा उतारब तोहार गोरिया ॥
बात लागल करेजवा में बान की तरह
पढ़े लिखे गुने लगलीं इन्शान की तरह
भइल किस्मत हमार गोटेदार गोरिया
कइसे करजा उतारब तोहार गोरिया
लेके मागीं में सेनुर पराया भइलू
बानी अबले हहात असहाय कइलू
हमके पूजेला यू पी बिहार गोरिया ।
कइसे करजा उतारब तोहार गोरिया ॥
बहुत खूब लिखने के लिए धन्वाद !
जवाब देंहटाएंबहुत खूब।
जवाब देंहटाएं..वर्ड वैरिफिकेशन हटाइये महराज।