शुक्रवार, 28 जनवरी 2011

दानव दहेजवा


दानव दहेजवा बनल बा कसाई ।

अपने ई देशवा से कब जाने जाई ।।

गांव नगर शहर शहर फइलल ई रोग बा,

पढल लिखल अनपढ़ गंवार सब लोग बा,

मतिया में सबके लगल बाटे काई ।

अपने ई देशवा से कब जाने जाई ।।

रूपिया के आगे बा रूप गुन फीका,

बिटिया के दुर्लभ भइल मांगटीका,

छलिया लगा आग देलन जलाई ।

अपने ई देशवा से कब जाने जाई ।।

दुलहिन क दुःख कवनों ससुई न बूझे,

उनहू के बेटी बा तनिको न सूझे,

कस लागी ससुरे में फांसी लगाई ।

अपने ई देशवा से कब जाने जाई ।।