गुरुवार, 3 फ़रवरी 2011

ससुई के अंचरा क थाती हवे बेटी

ई त बेटी नाहीं देखीं गंगाजल हवे ना ।

ई त परम पवित्र तुलसीदल हवे ना ॥

नइहर ससुर में उमर बंटि जाला ,

सुखवा आ दुखवा के दिन कटि जाला ,

बारों मास फरे वाला ऋतुफल हवे ना ।

ई त बेटी नाहीं देखीं गंगाजल हवे ना ।।

जेकरा के दान कइले पपवा पराला ,

घुंघटा सफल जब अँचर भरि जाला ,

दूनोकुल तारे वाली ई तरल हवे ना ।।

माई के परान क पियार पाती बेटी ,

ससुई के अंचरा क थाती हवे बेटी ,

अपना पति खातिर माया ई प्रबल हवे ना ।

ई त बेटी नाहीं देखीं गंगाजल हवे ना ।।

देवता के आगे पूजा थार हवे बेटी ,

हियरा के हीर आंसू धार हवे बेटी ,

कीच काच बीच कंचन कमल हवे ना ।

ई त बेटी नाहीं देखीं गंगाजल हवे ना ।।

नाजुक सनेहिया के डोर हवे बेटी ,

मघवा आ पुसवा के भोर हवे बेटी ,

सबका होठे होठे गीत आ गजल हवे ना ।।

सीमा वाले सइयां कर कटार हवे बेटी ,

भइया के कलाई के दुलार हवे बेटी ,

पति , पुत्र अरु पृथ्वी के बल हवे ना ।

ई त बेटी नाहीं देखीं गंगाजल हवे ना ।।

अन्नपूर्णा लक्ष्मी सरस्वती कहाले ,

होला जब समर रणचंडी बनि जाले ,

अबला कहाले पर सबल हवे ना ।

ई त बेटी नाहीं देखीं गंगाजल हवे ना ।