रात सपना में हमके बुला लिहलू - २
जब कि जिनगी में सचहूँ भुला दिहलू
रूप आ गुन क दुनिया पुजारी हवे
प्यार पैसा बदे सब भिखारी हवे
भीख मंगली त हमके झुला दिहलू
रात सपना में हमके बुला लिहलू ।
मन में कइ कइ तरह क विकार घेरलस
लाज संकोच खुद के विचार घेरलस
प्यार मिसिरी नियर तू घुला दिहलू
रात सपना में हमके बुला लिहलू ।
दर्द सपना कुरेदलस हरा हो गइल
तप के कंचन अगिन में खरा हो गइल
गीत गावत सुनावत रुला दिहलू
रात सपना में हमके बुला लिहलू ।
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