सोमवार, 13 दिसंबर 2010

रात सपना में हमके बुला लिहलू

रात सपना में हमके बुला लिहलू - २

जब कि जिनगी में सचहूँ भुला दिहलू

रूप आ गुन क दुनिया पुजारी हवे

प्यार पैसा बदे सब भिखारी हवे

भीख मंगली त हमके झुला दिहलू

रात सपना में हमके बुला लिहलू ।

मन में कइ कइ तरह क विकार घेरलस

लाज संकोच खुद के विचार घेरलस

प्यार मिसिरी नियर तू घुला दिहलू

रात सपना में हमके बुला लिहलू ।

दर्द सपना कुरेदलस हरा हो गइल

तप के कंचन अगिन में खरा हो गइल

गीत गावत सुनावत रुला दिहलू

रात सपना में हमके बुला लिहलू ।

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