शुक्रवार, 28 जनवरी 2011

दानव दहेजवा


दानव दहेजवा बनल बा कसाई ।

अपने ई देशवा से कब जाने जाई ।।

गांव नगर शहर शहर फइलल ई रोग बा,

पढल लिखल अनपढ़ गंवार सब लोग बा,

मतिया में सबके लगल बाटे काई ।

अपने ई देशवा से कब जाने जाई ।।

रूपिया के आगे बा रूप गुन फीका,

बिटिया के दुर्लभ भइल मांगटीका,

छलिया लगा आग देलन जलाई ।

अपने ई देशवा से कब जाने जाई ।।

दुलहिन क दुःख कवनों ससुई न बूझे,

उनहू के बेटी बा तनिको न सूझे,

कस लागी ससुरे में फांसी लगाई ।

अपने ई देशवा से कब जाने जाई ।।

सोमवार, 10 जनवरी 2011

दिहलू सुधार गोरिया

हमरे जिनगी के दिहलू सुधार गोरिया।

इसे करजा उतारब तोहार गोरिया॥

रहनीं गाँवे क बिगड़ल लखेरा गोरी

झूठ बोली लबरई करीं हम चोरी

प्यार मंगनी न सुनलू गोहार गोरिया ।

कइसे करजा उतारब तोहार गोरिया॥

कहलू अपने के जाके सुधार तनी

रूप नाहीं सहूरे क होख धनी

नाहीं सपना में पाइब विसार गोरिया ।

कइसे करजा उतारब तोहार गोरिया ॥

बात लागल करेजवा में बान की तरह

पढ़े लिखे गुने लगलीं इन्शान की तरह

भइल किस्मत हमार गोटेदार गोरिया

कइसे करजा उतारब तोहार गोरिया

लेके मागीं में सेनुर पराया भइलू

बानी अबले हहात असहाय कइलू

हमके पूजेला यू पी बिहार गोरिया ।

कइसे करजा उतारब तोहार गोरिया ॥