दानव दहेजवा बनल बा कसाई ।
अपने ई देशवा से कब जाने जाई ।।
गांव नगर शहर शहर फइलल ई रोग बा,
पढल लिखल अनपढ़ गंवार सब लोग बा,
मतिया में सबके लगल बाटे काई ।
अपने ई देशवा से कब जाने जाई ।।
रूपिया के आगे बा रूप गुन फीका,
बिटिया के दुर्लभ भइल मांगटीका,
छलिया लगा आग देलन जलाई ।
अपने ई देशवा से कब जाने जाई ।।
दुलहिन क दुःख कवनों ससुई न बूझे,
उनहू के बेटी बा तनिको न सूझे,
कस लागी ससुरे में फांसी लगाई ।
अपने ई देशवा से कब जाने जाई ।।