सोमवार, 19 मार्च 2012

माई क दुलार

अपने त माई पवलू माई क दुलार 
हमरा के काहें दिहलू कोखिये में मार,

पावे खातिर कइलू व्रत पूजा उपवास हो
ताना मरली गोतिनी जेठानी अउरी सास हो,
किरपा कइले विधना, न कइलू विचार-
हमरा के काहें दिहलू कोखिये में मार,

हमहू सुनीता, लक्ष्मी बाई बनतीं कल्पना,
महादेवी इंदिरा अंगनवां क अल्पना
बाकी तू समझलू माई धरती क भार
हमरा के काहें दिहलू कोखिये में मार, 

देतू सुख सुविधा सपूत बनि जइतीं,
लरिका औ लरिकी के भेदवा मिटइतीं 
बाजत शहनाई "कंचन" कबहूँ दुआर,
हमरा के काहें दिहलू कोखिये में मार, 

तोहरा से नीक बाने कवनो कसाई
बेटा बेटी चीन्हे आपन भाई बाप माई-
जान बुझ कबो न उठावे हथियार,
हमरा के काहें दिहलू कोखिये में मार,